अनुपूरक बजट जनता के लिए नहीं, चुनावी साल में सरकार की छवि चमकाने के लिए
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आज विधानसभा में पेश रु0 7,844 करोड़ के अनुपूरक बजट को जाती हुई सरकार का चुनावी बजट बताया। उन्होंने कहा कि राज्य आपदा, पलायन और बेरोजगारी से जूझ रहा है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता अपना प्रचार, मुख्यमंत्री की घोषणाएं और युवाओं को लुभाने वाली खरीदारी है।
प्रचार पर फिर रु0 125 करोड़
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सूचना विभाग को विज्ञापन के लिए रु0 125 करोड़ और दिए जा रहे हैं। इससे विभाग का इस साल का बजट रु0 549.68 करोड़ से बढ़कर रु0 675.13 करोड़ हो जाएगा। उन्होने कहा कि , धामी सरकार पिछले पांच वर्षों में विज्ञापनों पर रु0 1,001 करोड़ से अधिक खर्च कर चुकी है, और अकेले 2024-25 में रु0 290 करोड़ फूंके गए। अब मीडिया सलाहकार समिति के गठन के लिए भी रु0 45 लाख अलग से रखे गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि , चुनावी साल में जनता के पैसे से अपना चेहरा चमकाने की यह कवायद है।
टैबलेट से नहीं बहलेंगे जेन-जी
यशपाल आर्य ने कहा कि , डिजिटल लर्निंग के नाम पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा में टैबलेट के लिए रखे गए रु0 200 करोड़ पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि साढ़े चार साल तक युवाओं की सुध न लेने वाली सरकार अब जेन-जी से डरी हुई है। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे नौजवानों ने सरकार को आईना दिखाया है, और अब उन्हें रिझाने के लिए चुनाव से ठीक पहले टैबलेट बांटे जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पारदर्शी भर्ती और स्थायी रोजगार मांग रहा है, टैबलेट नहीं। इस झुनझुने से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। विडंबना यह है कि इसी अनुपूरक बजट में राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए केवल रु0 5.76 लाख रखे गए हैं।
घोषणाओं के लिए बिना हिसाब का पैसा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए रु0 100 करोड़ का एकमुश्त अनुदान मांगा गया है, जबकि मूल बजट में पहले से रु0 100 करोड़ थे। यानी सात महीने में रु0 200 करोड़, और बजट में एक भी काम, जिला या परियोजना का नाम नहीं। इसमें से रु0 25 करोड़ तो आकस्मिकता निधि से पहले ही निकाल लिए गए हैं। सरकार ने कुल करीब रु0 190 करोड़ आकस्मिकता निधि से पहले खर्च किए और अब सदन से मंजूरी मांग रही है, जो विधायी परंपराओं का अपमान है।
आपदा प्रदेश की प्राथमिकताएं उलटी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, राज्य ओला वृष्टि और आदि संकट से गुजर रहा है लेकिन मानसून में बाढ़ सुरक्षा के लिए रु0 10 करोड़, वनाग्नि रोकथाम के लिए रु0 7.07 करोड ही रखे हैं। उन्होने कहा कि, हर जिले में वन्य जीवों से होने वाली हानि मामलों का कई सालों का मुआवजा देना है लेकिन सरकार ने मानव वन्यजीव संघर्ष के लिए केवल रु0 3.20 करोड़ की धनराशि रखी है जबकि प्रचार के लिए रु0 125 करोड़।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि , मुख्यमंत्री घोषणाओं की अकेली मद को बाढ़ सुरक्षा, वनाग्नि, वन्यजीव संघर्ष, भोजन माताओं, विधवा पेंशन, किसान पेंशन और पुलों की सात मदों के कुल योग रु0 84.27 करोड़ से भी ज्यादा पैसा मिला है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि , राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि वाले व्यय में पर्यटन के नाम पर रु0 75 करोड़ रखे गए हैं। आपदा पीड़ितों का पैसा पर्यटन में क्यों जा रहा है, सरकार जवाब दे।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि, मुख्यमंत्री घोषणाओं के रु0 200 करोड़ की जिलेवार और कार्यवार सूची सदन के पटल पर रखी जाए। उन्होने कहा कि , पिछले पांच वर्षों के विज्ञापन खर्च पर श्वेत पत्र जारी हो, जिसमें बताया जाए कि किस माध्यम को कितना पैसा दिया गया। उन्होने सरकार से पूछा कि , सरकार को बताना चाहिए कि, पिछले पांच सालों में ई लर्निंग के नाम पर उसने कितना धन खर्च किया है और उसके नतीजे क्या हैं। उन्होनें कहा कि, राज्य के माध्यमिक विद्यालय प्रधानाचार्य और अध्यापक विहीन हैं और सरकार की प्रथामिकता में कुछ और है। उन्होंने मांग की कि , प्रचार का पैसा काटकर आपदा सुरक्षा, वनाग्नि रोकथाम और मानव वन्यजीव संघर्ष की मदों में डाला जाए।


