राजस्थान : राजस्थान में AMRUT 2.0 की 363 परियोजनाएं धीमी हैं। केंद्र से 3,552 करोड़ में केवल 745 करोड़ जारी...
Jeevan Jyoti News July 28, 2026
राजस्थान : राजस्थान में AMRUT 2.0 की 363 परियोजनाएं धीमी हैं। केंद्र से 3,552 करोड़ में केवल 745 करोड़ जारी हुए। भूमि विवाद, मंजूरियों में देरी और कोर्ट प्रतिबंध को प्रमुख वजह बताया गया। राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों की मुनादी के बीच AMRUT 2.0 योजना को लेकर सामने आई रिपोर्ट सरकार की चिंता बढ़ाने वाली है। शहरी पेयजल, सीवरेज और जलाशयों के निर्माण को लेकर चलाई जा रही इस केंद्र प्रवर्तित योजना रफ्तार ने सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल के एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं उनके अनुसार AMRUT 2.0 के तहत स्वीकृत 363 परियोजनाओं में कई कार्य विभिन्न कारणों से समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। काम पूरे नहीं होने की वजह से राज्य को स्वीकृत 3,552 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता में से केवल 745.12 करोड़ रुपए ही जारी किए गए हैं।
बता दें कि राजस्थान में AMRUT 2.0 के तहत 11,560.07 करोड़ रुपए लागत की 363 परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें 178 पेयजल परियोजनाएं (5,099.47 करोड़ रुपये), 48 सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएं , 134 जलाशय पुनर्जीवन परियोजनाएं तथा तीन पार्क एवं हरित क्षेत्र परियोजनाएं शामिल हैं। निकाय चुनावों में सड़क, पानी और सीवरेज जैसे स्थानीय मुद्दे सबसे अहम होते हैं। ऐसे में AMRUT 2.0 की धीमी प्रगति सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
प्रदेश में अब तक 109 पेयजल, 42 सीवरेज और 129 जलाशय पुनर्जीवन परियोजनाओं टेंडर जारी हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राजस्थान को 745.12 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मिली है। वहीं, 2026-27 के लिए 250 करोड़ रुपए की मदर सैंक्शन जारी की गई है, जिसमें से 20 जुलाई 2026 तक केवल 104.44 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं।
राज्य सरकार ने कई कारण गिनाए हैं। इनमें भूमि अधिग्रहण में देरी, कोर्ट में लंबित मामले, स्थानीय विरोध, वन विभाग, NHAI, रेलवे और पीडब्ल्यूडी से मंजूरियां समय पर नहीं मिलना प्रमुख हैं। कुछ स्थानों पर न्यायालय के निर्माण संबंधी प्रतिबंधों ने भी परियोजनाओं की गति प्रभावित की है।
सरकार ने यह भी माना है कि पाइपलाइन और सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई से लोगों को अस्थायी परेशानी हो रही है। केंद्र को बताया गया है कि परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है और निर्माण एजेंसियों को काम तेजी से पूरा कर सड़कों को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।