आज की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती खानपान की आदतों के बीच लोगों में थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे शरीर में मैग्नीशियम की कमी एक बड़ी वजह हो सकती है। यह जरूरी मिनरल मांसपेशियों, नसों, दिल और शरीर में ऊर्जा उत्पादन को सुचारू रखने में अहम भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है, नींद पूरी नहीं होती, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन रहती है, तो उसे अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स की नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत होती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों और चौलाई जैसी सब्जियों को मैग्नीशियम के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है। इन्हें सब्जी, सूप या अन्य व्यंजनों के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

केला: केले में मैग्नीशियम के साथ पोटैशियम भी पाया जाता है। इसे नाश्ते या दिन के दूसरे समय फल के तौर पर खाया जा सकता है।

नट्स और सीड्स: बादाम, काजू, अखरोट के अलावा कद्दू और सूरजमुखी के बीज भी मैग्नीशियम प्रदान करते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर और वसा भी मौजूद होती है।

दालें और बीन्स: चना, राजमा, लोबिया, मसूर और मूंग जैसी दालें मैग्नीशियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी देती हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

डार्क चॉकलेट: कोको की अधिक मात्रा वाली डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। हालांकि इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि कई उत्पादों में चीनी और कैलोरी अधिक हो सकती है।

मैग्नीशियम शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन लगातार थकान, ऐंठन या कमजोरी के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। संतुलित आहार के जरिए शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।