पटना : अगर आप सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएट करते हैं तो यह खबर आपके लिए काम की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने बिहार में वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री ने मंत्रिपरिषद् की बैठक में बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026 में बदलाव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस बदलाव के जरिए सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रचार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत सरकार की ओर से सूचीबद्ध यानी एम्पैनल किए गए सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स को निर्धारित मानकों के अनुसार उनके कंटेंट पर मिलने वाले व्यूज के आधार पर भुगतान किया जा सकेगा। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थिति में गैर-एम्पैनल्ड प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को व्यूज पर अच्छी राशि दी जाएगी।
बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति 2024 में आई थी। इसमें संशोधन किया गया। कई मीडिया समूहों से संशोधन की सिफारिश की जा रही है। इस तरह की नीति बनाने वाला बिहार पंजाब और उत्तर प्रदेश के बाद तीसरा राज्य है। इसके तहत बिहार के करीब दो हजार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इस नीति के तहत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सूचीबद्ध किए गए। पहले बहुत ज्यादा ही व्यूज लाने पर ही राशि मिलती थी। लेकिन, अब कम व्यूज लाने पर भी राशि मिलेगी। पहले कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ही फायदा होता था लेकिन अब लगभग सभी सूचीबद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को फायदा होगा।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार की नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि कोई भी वायरल वीडियो बनाने पर क्रिएटर को भुगतान मिल जाएगा। भुगतान के लिए कई शर्तों को पूरा करना होगा। कंटेंट की गुणवत्ता, संबंधित प्लेटफॉर्म, वास्तविक व्यूज, सरकारी अनुमति और अन्य पात्रता मानकों के आधार पर भुगतान तय किया जाएगा। सिर्फ सामान्य तौर पर बनाए गए या बिना सरकारी अनुमति के प्रकाशित किए गए कंटेंट को इस योजना के तहत भुगतान नहीं मिलेगा। यानी क्रिएटर को पहले तय प्रक्रिया के तहत सरकार के साथ जुड़ना होगा।
कौन इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं? इस सवाल पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से बताया गया कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सोशल मीडिया क्रिएटर, इंफ्लुएंसर या संबंधित संस्थान को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सूचीबद्ध होना जरूरी होगा। इसके लिए निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। सरकार सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनल के फॉलोअर्स की भी समय-समय पर जांच कर सकेगी। इसका उद्देश्य फर्जी या कृत्रिम तरीके से बढ़ाए गए फॉलोअर्स और व्यूज को रोकना है।
जो सूचीबद्ध नहीं हैं, उनके लिए क्या प्रावधान है? इस सवाल पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से बताया गया कि संशोधित नियमावली में कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-एम्पैनल्ड प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को भी विज्ञापन देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नियमों में किसी तरह की अस्पष्टता सामने आने पर आवश्यक स्पष्टीकरण जारी करने की व्यवस्था भी जोड़ी गई है।
राशि के लिए आधार क्या होगा? इस सवाल पर विभाग की ओर से बताया गया कि नई व्यवस्था के अनुसार कंटेंट पर निर्धारित अवधि में मिलने वाले व्यूज को भुगतान की गणना में शामिल किया जाएगा। 30 दिनों के दौरान प्राप्त व्यूज के आधार पर भुगतान तय करने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि अंतिम भुगतान सरकार द्वारा तय पात्रता और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने साहेब अली ने कहा कि पहले की अपेक्षा अब कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स को कम भुगतान करने लगे हैं। ऐसे में बिहार सरकार की यह पहल अच्छी है। जो बिहार सरकार से जुड़कर उनकी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, उन्हें लिए पैसे कमाने का अच्छा मौका है। वहीं लंबे समय से सूचना और जनसंपर्क विभाग में मीडिया समन्वयक आनंद कौशल कहते हैं कि सरकार को अपनी योजनाओं के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल करने का माध्यम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सूचीबद्ध कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अच्छे वीडियो बनाकर कमाई का नया अवसर भी तैयार होगा।


