हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। सोलन के नालागढ़...
Jeevan Jyoti News August 24, 2026
हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। सोलन के नालागढ़ और कुनिहार में करीब 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं सिरमौर में एक सप्ताह में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या बढ़कर 1039 हो गई है और 19 पशुओं की मौत हुई है। दोनों जिलों में टीकाकरण, निगरानी और संक्रमित पशुओं को अलग रखने पर जोर दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में पशुओं को प्रभावित करने वाले लंपी स्किन डिजीज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सोलन जिले के नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि सिरमौर में एक सप्ताह के भीतर लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 पहुंच गई है। सिरमौर में 19 पशुओं की मौत भी हो चुकी है। दोनों जिलों में पशुपालन विभाग ने निगरानी, टीकाकरण और संक्रमण रोकने के उपाय तेज कर दिए हैं।
सोलन जिले में नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई है। पंजाब और हरियाणा से सटे होने के कारण जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही पर पहले से निगरानी रखी जा रही थी। संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।
सिरमौर में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक सप्ताह पहले की तुलना में ऐसे पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 हो गई है। इनमें 513 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 507 पशुओं का उपचार चल रहा है। बीमारी के संभावित प्रकोप के बीच 19 पशुओं की मौत की सूचना है। शुरुआत में पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब क्षेत्र में लंपी जैसे लक्षण वाले पशु सामने आए थे। अब धारटीधार क्षेत्र के कुछ गांवों में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार बाहरी राज्यों से पशुओं की आवाजाही के दौरान संक्रमण जिले में पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
लंपी के खतरे को देखते हुए सिरमौर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक करीब 3000 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि विभाग को 60 हजार वैक्सीन डोज उपलब्ध हो गई हैं। विभाग ने उन क्षेत्रों में भी टीकाकरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी तक लंपी जैसे लक्षण सामने नहीं आए हैं।
पशुपालक क्या सावधानी बरतें?
- संक्रमित या संदिग्ध पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
- पशु में त्वचा पर गांठ, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
- बिना विशेषज्ञ की सलाह के उपचार न करें।
- बाहरी राज्यों से पशु लाने पर स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं।
- नए पशु को कुछ समय तक अन्य पशुओं से अलग रखने की सलाह का पालन करें।
- गोशाला और पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखें।
- विभाग की ओर से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में पशुओं का टीकाकरण करवाएं।